
आचार्य रामभद्राचार्य ने अपने बयान पर विवाद बढ़ने के बाद सफाई दी
आचार्य रामभद्राचार्य बोले – मैंने प्रेमानंद जी पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की, वो मेरे लिए पुत्रवत हैं
आचार्य रामभद्राचार्य ने कहा – एक आचार्य होने के नाते मैं सबको कहता हूँ कि संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए
आचार्य रामभद्राचार्य ने अपने बयान पर विवाद बढ़ने के बाद सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के बारे में कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है और वे उनके लिए पुत्रवत हैं। आचार्य रामभद्राचार्य ने कहा कि एक आचार्य होने के नाते वे सभी को संस्कृत का अध्ययन करने के लिए प्रेरित करते हैं।
आचार्य रामभद्राचार्य का बयान
आचार्य रामभद्राचार्य ने कहा, “मैंने प्रेमानंद जी पर कोई अभद्र टिप्पणी नहीं की है। वो मेरे लिए पुत्रवत हैं। एक आचार्य होने के नाते मैं सबको कहता हूँ कि संस्कृत का अध्ययन करना चाहिए।”
विवाद की पृष्ठभूमि
आचार्य रामभद्राचार्य के बयान पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सफाई दी है। इससे पहले उनके बयान पर संत समुदाय में आक्रोश था और कई संतों ने उनके खिलाफ नाराजगी जताई थी। संतों ने कहा था कि आचार्य रामभद्राचार्य को अपने ज्ञान पर अहंकार हो गया है और भक्ति का भाषा से कोई लेना-देना नहीं है।
संतों की प्रतिक्रिया
संतों ने आचार्य रामभद्राचार्य के बयान की निंदा की थी और कहा था कि वे अपने ज्ञान का प्रदर्शन करने के बजाय भक्ति और प्रेम पर ध्यान दें। संतों ने यह भी कहा था कि आचार्य रामभद्राचार्य को अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए [1].