कलयुग कथायुग है-अविराज सिंह

कलयुग कथायुग है-अविराज सिंह

सागर।भाजपा के युवा नेता श्री अविराज सिंह मकरोनिया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में शामिल हुये उन्होंने पूज्य महाराज पं. श्री विपिन बिहारी दास जी चरणों में प्रणाम करते हुए श्रीफल भेंट किया। कथा के आयोजक पं. श्री प्रमोद उपाध्याय जी का आभार व्यक्त किया।

युवा नेता श्री अविराज सिंह ने श्रीमद्भागवत कथा में अपने संबोधन में कहा कि पूज्य महाराज जी श्री छोटे सरकार जी के भी चरणों में कोटि कोटि प्रणाम करता हूँ। हम सभी निमित्त मात्र हैं। इच्छा ईश्वर की होती है। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से कथा आयोजित हुई। इस कथा का आयोजन श्री गणेश उत्सव के दौरान हो रहा है। जब पूरा राष्ट्र श्री गणेश उत्सव मना रहा है तो गणेश उत्सव के साथ साथ कथा का आयोजन हुआ है तो यह अपने आप में एक अलौकिक धार्मिक संगम है। धर्म का संगम है और जैसा हम सभी जानते हैं हमारा शरीर पंच तत्वों से निर्मित है। पांचों तत्वों के अधिदेव हैं। आकाश तत्व के अधिदेव भगवान शिव हैं, जलतत्व के अधिदेव भगवान विष्णु हैं। वायु तत्व की देवी मां भगवती है। अग्नि तत्व के भगवान, अग्नि तत्व के देव, भगवान, सूर्य और पृथ्वी तत्व के देव। भगवान श्री गणेश है और पांचों अधिवेशनों से और पंच तत्वों से ही हमारा यह शरीर निर्मित हुआ है। यह इस बात को प्रमाणित करता है कि हम सभी की आत्मा में अवश्य ही ईश्वर का वास है। हम सभी की आत्मा में ईश्वर का वास। है और पांचों अधिदेव में भगवान श्री गणेश प्रथम पूजनीय हैं। आज मैं आप सभी को श्रीमद भगवत गीता के महत्व से जुडी हुई कुछ पंक्तिया भी सुनाता हूँ। श्लोक भी सुनाता हूँ। गीता ब्रह्म स्वरूपिणी, गीता मोक्ष का द्वार, गीता ब्रह्म स्वरूपिणी गीता मोक्ष का द्वार, गीता गंगा ज्ञान की गीता महा सुख कार कृष्ण का मुख सरोज है। इस अमृत का स्त्रोत कृष्ण का मुख सरोज है। इस अमृत का स्रोत और इसमें आत्मा भीगे तो सिद्ध मनोरथ होत सिद्ध मनोरथ होत। यह श्रीमद भगवद गीता का महत्व है। हम सभी यह जानते हैं कि जितना धर्मलाभ हम सतयुग में कई वर्ष कई दिन पूजा पाठ करने के बाद अर्जित करते, कई वर्ष पूजा पाठ करने के बाद अर्जित करते उतना हमें कलयुग में श्रीमद भागवत कथा सुनने से ही मिल जाता है। यानि कलयुग कथा का युग है। कलयुग में कथा का सबसे ज्यादा महत्व है और श्रीमद भगवत गीता के तीन मुख्य संदेश है। तीन सार है। श्रीमद भगवत गीता का पहला सार है कि के जीवन में किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तीन शस्त्रों की जरूरत होती है। तीन शस्त्र हैं धर्म, धैर्य और साहस। इन तीन शस्त्रों की हर समस्या के लिए, हर चुनौती के लिए सामना करने की जरूरत होती है। श्रीमद् भागवत गीता का दूसरा सार है। एक काम, क्रोध और मोह ये नरक के तीन द्वार और तीसरा मुख्य संदेश है नास्ति सत्यार्थ परो धर्म, नास्ति सत्य परधर्म जिसका अर्थ है श्रीमद भगवद गीता में बोला गया है कि इस विश्व का सबसे बडा धर्म सत्य है और सत्य के मार्ग पर चलना ही सबसे बड़ा धर्म हम सभी के लिए होता है। भगवान श्री कृष्ण ने हमें संदेश दिया है। जो हमारे हाथ से निकल गया उस पर दुख नहीं करना चाहिए। जो हमारे पास है उस पर अहंकार नहीं करना चाहिए और जो हमारे पास नहीं है उसके लिए मोह नहीं करना चाहिए। भगवान श्रीकृष्ण का संदेश युवा साथियों को, युवा मित्रों को रामायण पढ़ने की जरूरत है। श्रीमद भगवत गीता पढ़ने की जरूरत है, क्योंकि यह हमारे संपूर्ण जीवन का सार है। सभी समस्याओं का समाधान इन ग्रंथों में है। भगवान श्रीकृष्ण ने हमें संदेश दिया है। जो हुआ अच्छे के लिए हुआ। जो अभी हो रहा है, अच्छे के लिए हो रहा है। जो हुआ अच्छे के लिए हुआ। जब मनुष्य शिक्षा से पहले संस्कार के बारे में, व्यवसाय से पहले, व्यवहार। श्रीमद् भागवत गीता के 18वें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं। सब कुछ त्याग कर सब चीजों का। सभी वस्तुओं का त्याग करके मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हें मोक्ष प्रदान कर दूंगा और सभी पापों को भी नष्ट कर दूंगा। भगवान श्रीकृष्ण लीला पुरुषोत्तम हैं।

मीडिया कार्यालय
दिनांकः-30/08/2025

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