जिला स्तरीय योगासन प्रतियोगिता का शुभारंभ मानसिक संतुलन एवं स्वास्थ्य के लिये योग ही सर्वोत्तम औषधि

जिला स्तरीय योगासन प्रतियोगिता का शुभारंभ मानसिक संतुलन एवं स्वास्थ्य के लिये योग ही सर्वोत्तम औषधि

सागर।

मानसिक असंतुलन तनाव की स्थिति में किसी दवा और औषधि से लाभ प्राप्त नहीं होगा। ऐसी परिस्थिति में मानसिक स्वास्थ्य संतुलन और तनावमुक्ति केवल योगमय जीवन शैली अपनाने से ही प्राप्त होगी। उक्त उद्‌गार योगाचार्य  विष्णु कुमार आर्य ने जिला सागर योगासन स्पोर्टस ऐसोशियेशन द्वारा बीटी इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस कालेज में आयोजित पांचवी जिला स्तरीय योगासन प्रतियोगिता के उद्घाटन के अवसर पर व्यक्त किये। श्री विष्णु आर्य ने कहा कि संस्कारों के स्थापन के लिये प्राचीन काल से प्रचलित गुरु शिष्य परंपरा के निर्वहन के माध्यम से चरित्र निर्माण, नवीन पीढ़ी का निर्माण और राष्ट्र निर्माण योगमय जीवन शैली के माध्यम से ही आज के युग में संभव है l

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.विनोद कुमार मिश्रा कुलगुरु रानी अवंती बाई लोधी विश्वविद्यालय ने इस अवसर पर कहा कि हमारी परंपरा में शरीर का सुख मन का सुख बुद्धि का सुख आत्मा का सुख यह सारे मुख्य बताएं गए हैं पश्चात सभ्यता भौतिकवाद की समर्थक जहां शरीर पर ही ध्यान दिया जाता है जबकि हमारी सभ्यता में शरीर सुख को केवल माध्यम बताया गया है जिससे मानसिक सुख, बौद्धिक सुख, तथा आत्मिक सुख की उपलब्धि हो सकती है। मनुष्य योग साधना के माध्यम से इस संकल्पना को प्राप्त कर एकात्मक भाव विकसित कर परमात्मा का साक्षात्कार कर सकता है योग द्वारा संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास होता है। और यह एक श्रेष्ठ मनुष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।इस प्रतियोगिता के माध्यम युवा वर्ग में योग का बीजारोपण होगा। रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय की कुलसचिव प्रो. शक्ति जैन ने कहा कि अवंती बाई विश्वविद्यालय में भी स्नातकोत्तर उपाधि में इस वर्ष से योग पाठ्यक्रम प्रारंभ किया गया है। यह योग के बढ़ते प्रभाव का ही प्रतिफल है ।
विशिष्ट अतिथि प्राणीशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. सुबोध कुमार जैन ने कहा कि हमारे संस्थान में गुरु शिष्य परंपरा का व्यापक असर है। विद्यासागर महाराज के विचारों के प्रभाव में संस्था मनुष्य निर्माण का कार्य कर रही है। इस दिशा में योग प्रतियोगिता का आयोजन संस्था में योग का बीजारोपण है। हम सभी योग की भावना का व्यापक प्रचार करने की कोशिश करेंगे। इसके पूर्व दीपप्रज्जवलन एवं माता सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण से कार्यक्रम आरंभ करने के बाद श्री विष्णु आर्य, प्रो. सुबोध जैन, संस्था के पदाधिकारी संदीप जैन, सत्येन्द्र जैन, योगाचार्य भगत सिंह, संरक्षक शैलेष केशवानी एवं डॉ. राजू टंडन ने फीता काटकर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया।

समाजसेवी शैलेष केशवानी ने कहा कि मनुष्य जीवन त्याग और समर्पण के संयोग से खुशहाल होता है। यह भावना योग अपनाने से अधिक प्रबल हो जाती है। ऐसे आयोजनों से समाज में योग की गंगा बहेगी।
स्वागत भाषण देते हुए मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र पतंजलि समिति प्रभारी भगत सिंह ने कहा कि आजके युग में रोगों की दिनों दिन बढ़ती जटिलता ने हमें सब स्वास्थ्य के प्रति चिंतन करने को मजबूर कर दिया है। शारीरिक और मानसिक संतुलन के योग की उपयोगिता समाज ने स्वीकार कर ली है, इसलिये अब परिवार और समाज में योग का प्रचलन हो गया है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में संस्था के प्राचार्य डॉ राजू टंडन ने कहा कि हमारा महाविद्यालय इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस है लेकिन एक विधा से कालेज अभी अछूता था वह विद्या योग विधा है। सागर को योग नगरी बनाने में अब हम भी सहभागी होकर ऐसे आयोजनों हेतु संस्था स्तर पर भरपूर सहयोग प्रदान करने का आश्वासन देते हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नितिन कोरपाल एवं आभार ज्ञापन डॉ. अरुण साव ने किया। प्रतियोगिता संपन्न कराने में आबजर्वर डॉ. अजय दुबे, डॉ. ब्रजेश ठाकुर,  जे. पी. विश्वकर्मा, मुख्य निर्णायक डॉ. रविकांत खरे, डॉ. श्रध्दा सोलंकी, कीर्तिका ठाकुर, निधि सेन, रोहित पटेल, प्रज्ञा साव, इकबालजीत, दीक्षा, पदाधिकारी के एस ठाकुर, डॉ. रूसिया, स्कूल प्राचार्य एसबी सिंह, उपप्राचार्य जयंती हजारी आदि ने उपस्थित होकर सहयोग दिया।

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